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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 68
श्येनाः प्ररुदन्त इव द्वारे क्रोशन्ति जम्बुका दीप्ताः । प्रविशेन्नरेन्द्रभवने कपोतकः कौशिको यदि वा ॥
यदि श्येन (बाज) अधिक रोते हुये की तरह दिखाई दे, सूर्य की तरफ मुख करके शृगाल (गोदढ़) पुरद्वार पर शब्द करे तथा राजभवन में कबूतर या उल्लू प्रवेश करे तो भय देने वाला होता है। कहीं-कहीं पर 'स्यानः' की जगह 'चान:' पाठ मिलता है।
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