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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 65
ब्राह्मणान् परमान्नेन दक्षिणाभिश्च बहुत्रदक्षिणा होमाः तर्पयेत् । कर्तव्याश्च। प्रयत्नतः ॥
यस से ब्राह्मणों को तृप्त करे और प्रयत्नपूर्वक बहुत अन की दक्षिणा देकर हवन करे।
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