गोलाङ्गलयोः सप्रे
दींशूर्पाद्युपस्करविकारे ।
क्रोष्टुकनादे च तथा शस्त्रभयं मुनिवच चेदम् ॥
बैल और इल का अचानक संयोग हो जाने, दर्दी (चमचा करीठ), शूर्प ( सूप छाज) आदि गृह-सामग्री में विकार उत्पन होने और मृगाल ( गीदड़) के
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