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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 62
अनभिहततूर्यनादः शब्दो वा ताडितेषु यदि न स्यात् । व्युत्पत्ती वा तेषां परागमो नृपतिमरणं वा ॥
अनभिहतानामताडितानां तूर्याणां नादः शब्दो यदि वा ताडितेष्वाहतेषु शब्दो रखो न स्यात्र भवेत्। तया तूर्याणां व्युत्पत्ती था। विविधा उत्पत्तिर्युत्पत्तिर्नानाशब्दकृत्। परागमः परचक्रस्यागमो भवति नृपते राज्ञो मरणं वा।
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