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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 61
गीतरवतूर्यशब्दा नभसि यदा वा चरस्थिरान्यत्वम् । मृत्युस्तदा गदा वा विस्वरतूयें पराभिभवः ॥
यदि आकाश में गीत या तुरही का शब्द सुनाई पड़े या स्थिर पदार्थ चर और चर पदार्थ स्थिर दिखाई दे तो मरण और रोग होता है। अथवा तुरही बजने से विकारयुत शब्द हो तो शत्रुओं से पराजय होती है।
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