मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 59
स्थालीपाकेन धातारं प्राजापत्येन मन्त्रेण पशुना च पुरोहितः यजेद्वद्वत्रदक्षिणम् ॥
इस उत्पात में ब्राह्मणों को सन्तुष्ट, जप और हवन करना चाहिये तथा चरु, पशु एवं प्राजापत्य मन्त्रों से ब्रह्मा का यज्ञ सम्पत्र कर प्रभूत अत्र की दक्षिणा देनी चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें