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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 56
परयोनावभिगमनं भवति तिरश्चामसाधु धेनूनाम्। उक्षाणो वान्योन्यं पिबति श्वा वा सुरभिपुत्रम् ॥
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