इसी प्रकार विकारयुत चतुष्पदों को भी समूह से अलग कर अन्य स्थान पर ले जाकर त्याग देना चाहिये; अन्यया ये विकारयुक्त चतुष्पद सम्बद्ध नगर, नगर के स्वामी और समूह का नाश कर देते हैं।
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