मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 54
नार्यः परस्य विषये त्यक्तव्यास्ता हितार्थिना। तर्पयेच्च द्विजान् कामैः शान्ति चैवात्र कारयेत् ॥
अपना हित चाहने वाले मनुष्य को विकारयुत खियों को अन्य देश में ले जाकर परित्याग कर देना चाहिये; साथ ही इच्छानुसार ब्राह्मणों को प्रसत्र कर इस उत्पात को शान्ति करनी चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें