अपना हित चाहने वाले मनुष्य को विकारयुत खियों को अन्य देश में ले जाकर परित्याग कर देना चाहिये; साथ ही इच्छानुसार ब्राह्मणों को प्रसत्र कर इस उत्पात को शान्ति करनी चाहिये।
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