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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 53
बहवोष्ट्रमहिषगोहस्तिनीषु यमलोद्भवे रणमरणमेषाम् । षण्मासात् सूतिफलं शान्तौ श्लोकी च गगोंक्तौ ॥
घोड़ी, ऊंटनी, भैंस, गाय और हथिनी को एक साथ दो बच्चे हों तो उन (घोड़ा आदि) का नाश होता है। छः मास बाद प्रसवविकार का फल प्राप्त होता है। इसकी शान्ति संस्कृत व्याख्या में पठित दो श्लोकों द्वारा करानी चाहिये।
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