प्रसविकारे स्त्रीणां द्वित्रिचतुष्प्रभृतिसम्प्रसूतौ वा। हीनातिरिक्तकाले च देशकुलसंक्षयो भवति ॥
खियों को किसी प्रकार का प्रसवविकार (घोड़ा, हाथी, बैल, सर्प आदि जन्तु को तरह जातक) होने पर अथवा एक साथ दो, तीन, चार आदि बच्चे होने पर अथवा प्रसवकाल ( 'तत्कालमिन्दुसहितो द्विरसांशको य' इत्यादि से निर्णीत काल) से पहले या बाद में प्रसव होने पर देश और कुल का नाश होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।