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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 52
प्रसविकारे स्त्रीणां द्वित्रिचतुष्प्रभृतिसम्प्रसूतौ वा। हीनातिरिक्तकाले च देशकुलसंक्षयो भवति ॥
खियों को किसी प्रकार का प्रसवविकार (घोड़ा, हाथी, बैल, सर्प आदि जन्तु को तरह जातक) होने पर अथवा एक साथ दो, तीन, चार आदि बच्चे होने पर अथवा प्रसवकाल ( 'तत्कालमिन्दुसहितो द्विरसांशको य' इत्यादि से निर्णीत काल) से पहले या बाद में प्रसव होने पर देश और कुल का नाश होता है।
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