सलिलोत्पत्तिरखाते गन्धरसविपर्यये च तोयानाम् । • सलिलाशयविकृतौ वा महद्भयं तत्र शान्तिमिमाम् ॥
बिना खोदी हुई जमोन में जल निकलना, जल के गन्ध और रसों में विपर्यय होना तथा जलाशयों में विकार उत्पन्न होना अग्निभय करने वाला होता है। इसकी शान्ति का प्रकार आगे कहते हैं।
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