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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 5
भौमं चरस्थिरभवं तच्छान्तिभिराहतं शममुपैति । नाभसमुपैति मृदुतां शाम्यति नो दिव्यमित्येके ॥
चलायमान वस्तु के स्थिर और स्थिर के चलायमान होने का नाम भौम उत्पात है। यह भीम उत्पात शान्ति से आहत होकर नष्ट हो जाता है, आनारिक्ष उत्पात शान्ति से कम हो जाता है और दिव्य उत्पात शान्ति से भी नष्ट नहीं होता। यह किसी-किसी आचार्य का मत है ।
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