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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 47
स्नेहासृड्मांसवहाः सङ्कलकलुषाः प्रतीपगाश्चापि । परचक्रस्यागमनं नद्यः कथयन्ति षण्मासात् ॥
यदि नदियों में तेल, रुधिर या मांस बहने लगें या जल स्वल्प और मलिन हो जाय तो छः मास बाद परचक्र का आगमन होता है।
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