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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 44
व्यने नभसीन्द्रधनुर्दिवा यदा दृश्यतेऽथवा रात्रौ । प्राच्यामपरस्यां वा तदा भवेत्क्षुद्धवं सुमहत् ॥
मेघरहित आकाश में दिन या रात्रि में इन्द्रधनुष पूर्व या पश्चिम दिशा में दिखाई दे तो अत्यन्त दुर्भिक्ष होता है।
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