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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 38
दुर्भिक्षमनावृष्टावतिवृष्टी शुद्धयं परभयं च। रोगो हानृतुभवायां नृपतिवधोऽनप्रजातायाम् ॥
अनावृष्टि हो तो दुर्भिक्ष, अतिवृष्टि हो तो दुर्भिक्ष तथा शत्रुभय, वर्षा ऋतु से भित्र ऋऋतु में गुष्टि हो तो रोग और विना मेघ की वृष्टि हो तो राजा की मृत्यु होती है।
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