विकृतकुसुमं फलं वा ग्रामादथवा पुराद्वहिः कार्यम्। सौम्योऽत्र चरुः कायों निर्वाप्यो वा पशुः शान्त्यै ॥
विकारयुत पुष्प और फलों को गाँव से बाहर कर देना चाहिये तथा सोम देव की चरु बनानी चाहिये और शान्ति के लिये बकरा भी दान करना चाहिये।
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