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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 35
अर्धेन यदा तैलं भवति तिलानामतैलता या स्यात् । अनस्य च वैरस्यं तदा तु विन्द्याद् भयं सुमहत् ॥
यदि तिल के परिमाण से आधे तेल का परिमाण हो या तिल से बिलकुल तेल नहीं निकलता हो और अत्र में विरसता भालूम हो तो अति भय होता है।
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