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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 34
अतिवृद्धिः सस्यानां नानाफलकुसुमसम्भवो वृक्षे । भवति हि यद्येकस्मिन् परचक्रस्यागमो नियमात् ॥
यदि धान्यों को अधिक वृद्धि तथा एक वृक्ष में अनेक प्रकार के फल और पुष्यों की उत्पत्ति हो तो निश्चय हो परचक्र का आगम होता है।
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