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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 31
खग्गन्यधूपाम्बरपूजितस्य छत्रं विद्यायोपरि पादपस्य । कृत्वा शिवं रुद्रजपोऽत्र कायर्यो रुद्रेभ्य इत्यत्र पडेव होमाः ॥
इस उत्पात में सुगन्ध द्रव्य, धूप और वस्त्रों से पूजित विकारयुत वृक्ष के ऊपर छत्र रखकर एकादश रुद्रों के मन्त्रों का जप करे।
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