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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 3
मनुजानामपचारादपरक्ता देवताः सृजन्त्येतान् । तत्प्रतिघाताय नृपः शान्तिं राष्ट्र प्रयुञ्जीत ॥
मनुष्यों के अधिनय से अप्रसत्र देवता गण उन उत्पातों को उत्पन्न करते हैं। उनके निवारण के लिये राजा को शान्ति करानी चाहिये ।
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