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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 29
पूजितवृक्षे ह्यनृतौ कुसुमफलं नृपवधाय निर्दिष्टम्। धूमस्तस्मिन् ज्वालाऽ बवा भवेनृपवद्यायैव ॥
प्रधान वृक्ष में पुष्प और फलों की उत्पत्ति राजा के नाश के लिए और उस ( प्रधान वृक्ष) पर धूप या अग्नि की ज्वाला भी राजा के नाश के लिये ही होती है।
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