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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 28
शुष्कावराह वायान्नसक्षयः शाषण च विरुजानाम्। पतितानामुत्थाने स्वयं भयं दैवजनितं च ॥
सूखे हुये वृक्षों में वृक्षों में विरोह (पुनः : अङ्कर) होने से बल और अन्न का नाश तथा गिरे हुये वृक्षों के अपने-आप उठने से दैवजनित भय होता है।
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