आयुधज्वलनसर्पणस्वनाः कोशनिर्गमनवेपनानि वा। वैकृतानि यदि वायुधेऽपराण्याशु रौद्ररणसङ्कलं वदेत् ॥
खड्ग आदियों में जलन उत्पन्न होना, उनका चलायमान होना, उनमें शब्द होना, उनका म्यान से निकल आंना अथवा शत्र में अन्य किसी प्रकार का विकार उत्पन होना- ये सब शीघ्र ही राज्य में भयङ्कर सांयम कराते हैं।
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