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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 22
नगरचतुष्पादण्डजमनुजानां भयकरं ज्वलनमाहुः । धूमाग्निविस्फुलिङ्गः शय्याम्बरकेशगैमृत्युः ॥
नगर, पशु, पक्षी या मनुष्यों में अग्नि के विना जलन पैदा हो तो अधिक भय- कारी होता है। शय्या, वत्र या केशों में धूम, अग्नि को ज्वाला या अग्नि की चिनगारियों दिखाई दें तो स्वामी को मृत्यु होती है।
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