प्रासादभवनतोरणकेत्वादिष्वननलेन दग्धेषु । तड़िता वा षण्मासात् परचक्रस्यागमो नियमात् ॥
प्रासाद (देवगृह), घर, तोरण या ध्वज अग्नि के बिना या बिजली से दग्ध हो जार्थं तो छः मास बाद निक्ष्य ही दूसरे राजा की सेनाओं का आगमन होता है।
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