राष्ट्र यस्यानग्निः प्रदीप्यते दीप्यते च नेत्यनवान् । मनुजेश्वरस्य पीडा तस्य च राष्ट्रस्य विज्ञेया ॥
जिस राजा के राज्य में विना अग्नि की ज्वाला दिखाई दे और काष्ठयुत अग्नि
प्रज्वलित म हो तो उस राय और देश को पीड़ा होती है।
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