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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 14
रक्षः पिशाचगुहाकनागानामेवमेव निर्दिष्टम्। मासैश्चाप्यष्टाभिः सर्वेषामेव फलपाकः ॥
इसी प्रकार राक्षसों में उत्पत्र विकृति राजकुमारों को, पिशाचों में उत्पन विकृति राजकुमारियों को, पक्षों में उत्पन्न विकृति राजपत्नियों को और नागों में उत्पत्र विकृति राजसेवकों को अशुभ फल देने वाली होती है। इन सभी उत्पातों का फल आठ महीने में भटित होता है।
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