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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 13
देवकुमारकुमारीवनिताप्रेष्येषु वैकृतं यत् स्यात् । तन्त्ररपतेः कुमारककुमारिकास्त्रीपरिजनानाम् ॥
देयाङ्गनाओं में उत्पन्न विकृति राजपत्नियों को एवं देवताओं के दास में उत्पन विकृति राजाओं के रोमकों को अशुभ फल प्रदान करने पालो होती है।
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