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बृहत्संहिता • अध्याय 46 • श्लोक 10
ऋषिधर्मपितृब्रह्मप्रोद्धतं वैकृतं द्विजातीनाम् । यद्वद्रलोकपालोद्भवं पशूनामनिष्टं तत् ॥
मुनि, धर्म, पिता और ब्रह्मा में उत्पन्न विकृति ब्राह्मणों को; महादेव और लोकपालों ( इन्द्र आदि) में उत्पन्न विकृति पशुओं को; बृहस्पति, शुक्र और शनै घर में उत्पत्र विकृति पुरोहितों को;
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