अभ्यर्चिता न परुषं वक्तव्या नापि ताडनीयास्ते।আর पुण्याहशङ्खतूर्यध्वनिगीतरवैर्विमुक्तभयाः
पुण्याहवाचन, शङ्खध्वनि, पेरी की ध्वनि तथा गीत के शब्दों से भयरहित, पूजित घोड़े को डराना और चाबुक आदि से मारना नहीं चाहिये।
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