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बृहत्संहिता • अध्याय 44 • श्लोक 4
सर्जोदुम्बरककु भशाखामयशान्तिसद्म कुशबहुलम् । वंशविनिर्मितमत्स्यध्वजचक्रालङ्कृतद्वारम् ॥
विजयसार, गूलर या अर्जुन वृक्ष की डालियों से युत तथा बाँसों से रचित मत्स्य ध्वज और चक्रों से अलंकृत शान्तिगृह बनाना चाहिये ।
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