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बृहत्संहिता • अध्याय 44 • श्लोक 28
सम्प्रदृष्टनरवाजिकुञ्जरं निर्मलप्रहरणांशुभासुरम् । निर्विकारमरिपक्षभीषणं यस्य सैन्यमचिरात् स परात् स गां जयेत् ॥
जिस राजा के हर्पित मनुष्य, थोड़े और हाथियों से युत, निर्मल खद्ग आदि से प्रकाशमान, विकारसहित और शत्रु के लिये भयावह सेनागण हो, यह शीघ्र हो पृथ्वी को जोत लेता है।
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