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बृहत्संहिता • अध्याय 44 • श्लोक 27
इन्द्रधनु को कान्ति धारण किया हुआ राजा अथवा उड़ते हुये घोड़े, पृथ्वी को विदारण करते हुये हाथी और शत्रु को जीतने वाले मनुष्यों के साथ मानो देवताओं से घिरे हुये इन्द्र के समान राजा गमन करे।
अथवा होरा-मोठी से युत खेत माला, चेत पगड़ी, खेत चन्दन तथा घेत वखों से युत, छत्रधारी और हाथी पर बैठा हुआ राजा मेघ के ऊपर और चन्द्र के नीचे विराजमान शुक्र की तरह गमन करे। यहाँ मेघ के स्थान पर हाथी, चन्द्र के स्थान पर छत्र और शुक्र के स्थान पर राजा को समझना चाहिये।
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