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बृहत्संहिता • अध्याय 44 • श्लोक 23
मृदङ्गशङ्ख ध्वनिहष्टकुञ्जरस्रवन्मदामोदसुगन्यमारुतः शिरोमणिप्रान्तचलत्प्रभाचयैर्ध्वलन् विवस्वानिव तोयदात्यये ॥
मृदङ्ग और शङ्ख की ध्वनि से हर्षित होकर हाथियों के झरते हुये मदजलों को सुगन्धि से पुत वायु वाला ( क्योंकि शरद् ऋतु में सुगन्धित वायु चलती है) और मुकुट में जड़ी हुई मगियों के प्रान्त भाग में
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