खलिनं हयाय दद्यादभिमन्य पुरोहितस्ततो राजा । यायान्नीराजितः सबलः ॥
बाद में पुरोहित खलौन (लगाम) को अभिमन्त्रित करके घोड़े के मुख में दे। फिर उस पर नीराजन किया हुआ राजा बैठकर सेनाओं के साथ ईशान कोण की ओर गमन करे ।
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