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बृहत्संहिता • अध्याय 44 • श्लोक 2
द्वादश्यामष्टम्यां कार्तिकशुक्लस्य पञ्चदश्यां वा। आश्वयुजे वा कुर्यान्नीराजनसंज्ञितां शान्तिम् ॥
कार्तिक या आश्विन के शुक्ल पक्ष की द्वादशी, अष्टमी, पूर्णिमा या अमावास्या के दिन नीराजन नामक शान्ति करनी चाहिये।
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