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बृहत्संहिता • अध्याय 44 • श्लोक 19
पिण्डमभिमन्त्र्य दद्यात् पुरोहितो वाजिने स यदि जिप्रेत्। अश्नीयाद्वा जयकृद्विपरीतोऽतोऽन्यथाभिहितः ॥
पुरोहित अत्र के पिण्ड को अभिमन्त्रित करके घोड़े को दे दे। यदि घोड़ा उस अन के पिण्ड को सूपे या कुछ खा जाय तो राजा की विजय करने वाला, अन्यथा पराजय करने वाला होता है।
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