पिण्डमभिमन्त्र्य दद्यात् पुरोहितो वाजिने स यदि जिप्रेत्। अश्नीयाद्वा जयकृद्विपरीतोऽतोऽन्यथाभिहितः ॥
पुरोहित अत्र के पिण्ड को अभिमन्त्रित करके घोड़े को दे दे। यदि घोड़ा उस अन के पिण्ड को सूपे या कुछ खा जाय तो राजा की विजय करने वाला, अन्यथा पराजय
करने वाला होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।