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बृहत्संहिता • अध्याय 44 • श्लोक 18
त्रस्यन्नेष्टो राज्ञः परिशेषं चेष्टितं द्विपहयानाम् । यात्रायां व्याख्यातं तदिह विचिन्त्यं यथायुक्ति ॥
अत: घोड़े की जगह हाथी को भी लेना चाहिये। हाथी और घोड़े की शेष चेष्टाओं का फल 'यात्रा' नामक ग्रन्थ में जिस प्रकार मैंने कहा है, उसी प्रकार युक्तिपूर्वक यहाँ पर भी विचार करना चाहिये।
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