जिस राजा के द्वारा लाया गया घोड़ा दक्षिण चरण उठाकर खड़ा रहे, वह राजा शीघ्र ही बिना परिश्रम शत्रु को जीत लेता है। यदि घोड़ा डर जाय तो राजा का शुभ नहीं होता। यहाँ घोड़ा का ग्रहण उपलक्षणमात्र है
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