पूर्वाभिमुखः श्रीमान् वैयाने चर्मणि स्थितो राजा । तिष्ठेदनलसमीपे तुरगभिषग्दैववित्सहितः ॥
व्याघ्र के चर्म पर पूर्वाभिमुख होकर अग्नि के समीप में वैद्य और ज्यौतिषी के साथ श्रीमान् राजा बैठे।
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