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बृहत्संहिता • अध्याय 44 • श्लोक 11
कलशेष्वेताः कृत्वा सम्भारानुपहरेद्वलिं सम्यक् । भक्ष्यैर्नानाकारैर्मधुपायसयावकप्रचुरैः ॥
शतावरी, सोमवल्ली- इन सब ओषधियों को बराबर- बराबर लेकर पूर्ण कलश में शहद, पायस देकर यावकों (कुरधियों से युत अनेक प्रकार के भक्ष्य पदार्थों के साथ बलि देना चाहिये
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