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बृहत्संहिता • अध्याय 44 • श्लोक 10
श्वेतां सपूर्णकोशां कटम्भरात्रायमाणसहदेवीः। नागकुसुमं स्वगुप्तां शतावरीं सोमराजीं च ॥
श्वेता (गिरिकर्णी = अपराजिता), पूर्णकोशा, महाश्वेता (उजला गंगा फल), त्रायमाण (चिरायते का फल), सहदेवी, नागपुष्य, स्वगुप्ता (क्याँच = कवाछ),
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