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बृहत्संहिता • अध्याय 44 • श्लोक 1
भगवति जलधरपक्ष्मक्षपाकरार्केक्षणे कमलनाथे । उन्मीलयति तुरङ्गमकरिनरनीराजनं कुर्यात् ॥
मेघरूप पलक तथा चन्द्र-सूर्यरूप दोनों नेत्र वाले भगवान् कमलनाम के नेत्र खोलने पर घोड़ा, हाथी और मनुष्यों को नीराजन (जल का स्पर्श) करना चाहिये ।
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