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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 9
प्रीतो महेन मघवा प्राहैवं ये नृपाः वसुवद्वसुमन्तस्ते भुवि सिद्धाज्ञा करिष्यन्ति । भविष्यन्ति ॥
राजा वसु की पूजा से प्रसन्न होकर इन्द्र ने कहा- राजा वसु की तरह जो राजा उत्सव करेगा, वह अनेक प्रकार के रत्नों से युत पृथ्वी पर आदेश जरने वाला राजा होगा।
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