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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 7
स किङ्किणीजालपरिष्कृतेन स्रक्छत्रघण्टापिटकान्वितेन । समुच्छ्रितेनामरराद्ध्वजेन निन्ये विनाशं समरेऽरिसैन्यम् ॥
किङ्किणियों (सूक्ष्म घण्टाओं) के समूह से भूषित, माला, छत्र, घण्टा और पिटक ( ध्वजा में लगाने का एक प्रकार का भूषण) से युत उत्रत ध्वज के द्वारा युद्ध में शत्रु की सेना का नारा किया।
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