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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 67
उपरिचरवसुप्रवर्तितं नृपतिभिरप्यनुसन्ततं कृतम् । विधिमिममनुमन्य पार्थिवो न रिपुकृतं भयमाप्नुयादिति ॥
उपरिचर बसु द्वारा चलाई हुई और सदा राजाओं से की हुई इस विधि को करके राजा शत्रुकृत भय को नहीं प्राप्त कर पाता है।
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