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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 65
रज्जूत्सङ्गच्छेदने बालपीडा राज्ञो मातुः पीडनं मातृकायाः । यद्यत्कुर्युश्चारणा बालका वा तत्तत्तादृग्भावि पापं शुभं वा ॥
यदि इन्द्र-ध्वज उठाने के समय रस्सी कहीं से टूट जाय तो चालकों को और मातृका (तोरण का पार्श्ववर्ती काष्ठ) टूट जाय तो राजमाता को पीड़ा होती है।
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