मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 64
ग्लायन्त्युदक्प्रभृति च क्रमशो द्विजाधान् भने तु बन्यकिवधः कथितः कुमार्याः ॥
ध्वज के उत्तर दिशा में कोई उत्पात हो तो ब्राह्मणों को, पूर्व में क्षत्रियों को, दक्षिण में वैश्यों को और पश्चिम में कोई उत्पात हो तो शुद्रों को पीड़ित करेता है तथा यदि शक्र- कुमारी टूटे तो वेश्याओं का नाश होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें