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बृहत्संहिता • अध्याय 43 • श्लोक 63
राज्ञीी. शं पतिता पताकाकरोत्यवृष्टिं पिटकस्य पातः । मध्यात्रः षु च केतुभङ्गो निहन्ति मन्त्रिक्षितिपालपौरान् ॥
ध्वज यदि धुआँ से व्याप्त हो जाय तो अग्निभय, अन्धकार से व्याप्त हो जाय तो विकलता और वहाँ पर सर्प दब कर मर जायँ या गिरें तो मन्त्रियों का नाश होता है।
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